भारत का कुश डिफेंस सिस्टम: हवाई रक्षा में एक नया अध्याय

भारत अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। इसका ताजा सबूत है प्रोजेक्ट कुश, एक स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली जो रूस के मशहूर S-400 सिस्टम को भी चुनौती देने की काबिलियत रखती है। यह सिस्टम न सिर्फ भारत की हवाई सीमाओं को मजबूत करेगा, बल्कि पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और चीन के लिए भी एक सख्त संदेश होगा। आइए, इस देसी रक्षा कवच के बारे में विस्तार से जानें।

प्रोजेक्ट कुश क्या है?

प्रोजेक्ट कुश, जिसे विस्तारित रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) भी कहा जाता है, भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसका मकसद एक ऐसी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली बनाना है, जो ड्रोन, लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे खतरों को नाकाम कर सके। यह सिस्टम भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का जवाब दिया जा सके।

इसकी ताकत कितनी है?

कुश सिस्टम की खासियत इसकी जबरदस्त रेंज और सटीकता है। यह:

  • 250 किलोमीटर दूर तक लड़ाकू विमानों को निशाना बना सकता है।
  • 350 किलोमीटर की दूरी पर बड़े विमानों को ढेर कर सकता है।
  • एक मिसाइल से लक्ष्य को भेदने की संभावना 80% और दो मिसाइलों से 90% है।

इसके अलावा, यह सिस्टम ड्यूल-पल्स मोटर और थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल जैसी उन्नत तकनीकों से लैस है, जो इसे और भी घातक बनाती हैं। यह भारत के मौजूदा सिस्टम्स जैसे आकाश, बराक-8 और S-400 के साथ मिलकर एक मजबूत रक्षा नेटवर्क तैयार करेगा।

S-400, आयरन डोम और पैट्रियट से तुलना

  • रूस का S-400: यह सिस्टम छोटी, मध्यम और लंबी दूरी के खतरों से निपट सकता है, जबकि कुश का फोकस खास तौर पर लंबी दूरी पर है।
  • इजराइल का आयरन डोम: इसकी रेंज केवल 70 किलोमीटर है, जो कुश की 350 किलोमीटर की क्षमता के सामने काफी कम है।
  • अमेरिका का पैट्रियट: यह 110 किलोमीटर तक के खतरों को ट्रैक कर सकता है, लेकिन कुश की रेंज और सटीकता इसे पीछे छोड़ देती है।

कुश की यह खूबी इसे क्षेत्रीय हवाई रक्षा के लिए एक भरोसेमंद हथियार बनाती है।

कैसे बना यह सिस्टम?

कुश का विकास DRDO और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के सहयोग से हो रहा है। मई 2022 में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इसे मंजूरी दी थी। इसमें लंबी दूरी के रडार और अलग-अलग रेंज (150 किमी, 250 किमी, 350 किमी) की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं। यह सिस्टम पूरी तरह से मोबाइल है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से कहीं भी तैनात किया जा सकता है।

कब तक तैयार होगा?

कुश डिफेंस सिस्टम को 2028-2029 तक भारत की सीमाओं पर तैनात करने की योजना है। एक बार तैयार होने के बाद, यह न सिर्फ दुश्मन के हमलों को नाकाम करेगा, बल्कि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा जिनके पास अपनी लंबी दूरी की हवाई रक्षा प्रणाली है।

पाकिस्तान और चीन के लिए चुनौती

पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के तनावपूर्ण रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं। ऐसे में कुश का आना इन देशों के लिए एक बड़ा झटका होगा। 350 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन की हरकतों पर नजर रखने और उन्हें नष्ट करने की इसकी क्षमता इसे एक शक्तिशाली हथियार बनाती है। खास तौर पर चीन, जो अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है, अब कोई भी कदम उठाने से पहले दो बार सोचेगा।

भारत के लिए क्यों जरूरी?

हाल के वर्षों में हवाई हमलों का खतरा बढ़ा है। ड्रोन, स्टील्थ जेट और स्मार्ट बम जैसे हथियारों ने युद्ध का तरीका बदल दिया है। भारत के पास पहले से रूस से खरीदा गया S-400 सिस्टम है, जिसकी कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये थी। लेकिन कुश का होना भारत को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उसकी रक्षा नीति को और मजबूत करेगा।

निष्कर्ष

प्रोजेक्ट कुश सिर्फ एक हवाई रक्षा प्रणाली नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह सिस्टम न केवल देश की सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाएगा कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में किसी से पीछे नहीं है। 2029 तक जब यह तैयार होगा, तो भारत की हवाई ताकत एक नए मुकाम पर होगी, और दुश्मनों के लिए यह एक साफ चेतावनी होगी—भारत की सीमाएं अभेद्य हैं।

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