पहलगाम हमले के बाद, भारतीय सेना एलएसी पर पूरी सतर्कता के साथ तैनात

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) पर अपनी चौकसी और तैयारियों को और मजबूत कर दिया है। खासतौर पर पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की तैनाती पूरी तरह से बरकरार है और यहां कोई कमी नहीं की गई है। एलएसी पर लगातार पैट्रोलिंग और आधुनिक तकनीकों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।

सेना सूत्रों के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर निगरानी दो मुख्य तरीकों से होती है — पारंपरिक गश्त के साथ-साथ उन्नत तकनीकी उपकरणों से। इस क्षेत्र में मानव रहित हवाई यंत्र (ड्रोन) समेत विभिन्न टोही उपकरणों की तैनाती की गई है जो इलाके की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करते हैं। इन उपकरणों में मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) ड्रोन, मिनी रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPAS), स्वार्म ड्रोन और नैनो ड्रोन शामिल हैं।

2019-20 की सीमा घटनाओं के बाद से सेना ने पूर्वी लद्दाख में एक इंटिग्रेटेड इंटेलिजेंस और सर्विलांस ग्रिड तैयार किया है। इसे नई पीढ़ी के अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है ताकि सीमापार की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। 24 घंटे सतत निगरानी के लिए ये व्यवस्था बेहद प्रभावी साबित हो रही है।

इसके अलावा, पूर्वी लद्दाख में संचार तंत्र को भी मजबूत किया गया है। ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के साथ-साथ सैटेलाइट आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम को जोड़ा गया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।

रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी प्राथमिकता दी जा रही है। सीमा तक संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बीआरओ (बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन) और अन्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। अटल टनल और ज़ेड मोड़ टनल जैसे महत्वपूर्ण मार्ग बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि शिंकुन ला और ज़ोजिला टनल निर्माणाधीन हैं। इन सड़कों और सुरंगों से सभी मौसमों में क्षेत्र तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। बीआरओ की योजना के तहत लगभग 2330 किलोमीटर की सड़कों का विकास किया जा रहा है, जिससे पूर्वी लद्दाख में सैनिकों और सामग्रियों की आवाजाही और भी सुगम होगी।

इस तरह, पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने एलएसी पर अपनी चौकसी और सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया है, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए अहम है।

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